शिव मंदिरो में भारी संख्या में उमड़ी भक्तो की भीड़, " ॐ नमः शिवाय "
महाशिवरात्रि को लेकर रविवार की सुबह चार बजे से मंदिरो में भक्तिो की अधिक संख्या में भीड़ उमडने लगी है। इस दिन बच्चो से लेकर बूढे शिव मंदिर जाकर सच्चे दिल से शिव भगवान की पूजा— पाठ करते है। इस दिन शिव भगवान ने माता पार्वती से विवाह किया है। तब से इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। कुमारी महिलाएं शिव जैसे पति के लिए इस पूरी भक्ति और सच्चाई के साथ व्रत रखती है।
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12:36 PM, Feb 15, 2026
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शिव मंदिरो में भारी संख्या में उमड़ी भक्तो की भीड़ सौ0 bma7.in
उत्तर प्रदेश। महाशिवरात्रि को लेकर रविवार की सुबह चार बजे से मंदिरो में भक्तिो की अधिक संख्या में भीड़ उमडने लगी है। इस दिन बच्चो से लेकर बूढे शिव मंदिर जाकर सच्चे दिल से शिव भगवान की पूजा— पाठ करते है। इस दिन शिव भगवान ने माता पार्वती से विवाह किया है। तब से इस दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। कुमारी महिलाएं शिव जैसे पति के लिए इस पूरी भक्ति और सच्चाई के साथ व्रत रखती है। शिव भगवान को सभी देवताओं में प्रथम स्थान दिया गया है। शिव भगवान के मन में हर एक मनुष्य में स्थान होता है। क्योकि,शिव हर किसी के मन में ही तो रहते है।
व्रत का प्रारंभ और संकल्प कैसे होगा ?
महाशिवरात्रि का व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ होता है।स्नान के बाद साफ कपड़े (अधिमानतः सफेद या पीले) पहनें।हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान शिव के सामने पूरे दिन और रात व्रत रखने का संकल्प लें।
व्रत में क्या है पूजा विधि (दिन और रात)?
शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी (पंचामृत) से अभिषेक करें।भगवान को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, भस्म और चंदन अर्पित करें। पूरे दिन 'ओम नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का यथाशक्ति जाप करें।महाशिवरात्रि पर रात के चारों प्रहर में पूजा करने का विशेष महत्व है — प्रथम प्रहर: शाम 06:11 से रात 09:23 तक,द्वितीय प्रहर: रात 09:23 से रात 12:35 तक,तृतीय प्रहर: रात 12:35 से सुबह 03:47 तक, चतुर्थ प्रहर: सुबह 03:47 से सुबह 06:59 तक।
आहार के नियम क्या है?
बताया जाता है कि,व्रत के दिन आप फल, दूध, मेवे, और साबूदाने की खिचड़ी खा सकते हैं। व्रत में कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा और समा के चावल का उपयोग किया जा सकता है। अनाज (गेहूं, चावल), दालें, प्याज, लहसुन और मांस-मदिरा का पूरी तरह त्याग करें और साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें।इस दिन रात्रि जागरण (रात भर जागना) का विशेष महत्व है, जिसमें भजन और कीर्तन करना चाहिए।मन में क्रोध, बुराई या नकारात्मक विचार न लाएं और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए क्या चढाते है ?
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर अर्पित करते हैं। इन पांच चीजों के मिश्रण को पंचामृत कहा जाता है, जो महादेव को अत्यंत प्रिय है।तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक माना जाता है और इसे चढ़ाने से पापों का नाश होता है।ये शिवजी के प्रिय माने जाते हैं और अहंकार के त्याग का प्रतीक हैं। कार्यों में सफलता के लिए शमी के पत्ते भी अर्पित किए जाते हैं।भगवान शिव को सफेद फूल जैसे आक (मदार), कनेर, और धतूरे के फूल विशेष रूप से पसंद हैं।

लेखक के बारे में
मुस्कान सिंह
रिपोर्टर